पवित्र बाइबल उत्पत्ति ग्रंथ से सिद्ध होता है कि परमात्मा मानव सदृश शरीर में है जिसने 6 दिन में सर्व सृष्टि रची तथा 7 वे दिन विश्राम किया।
माँस ना खाओ।परमात्मा की साधना करने के उद्देश्य से (रोजे)व्रत रखते हो,(तसबी) माला से जाप भी करते हो। फिर खून करते हो यानि गाय,मुर्गी-मुर्गा,बकरा मारते हो।यह परमात्मा के विधान के खिलाफ है जानवरो को मारकर खाना मानव का नही राक्षसो का कार्य है मास खाना भगवान का आदेश नही है।
स्वर्ग से भी अच्छा है सतलोक जहा पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब रहते है सतलोक जाने के लिए सत भक्ति आवश्यक है और पुरी दुनिया मे सत भक्ति सिर्फ Saint Rampal Ji Maharaj ही बताते है संत रामपाल जी ने कहा है कि जीव हिसा पाप है.
सतगुरु पुरुष कबीर है ,चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए हो गए भूत मसान । पूर्ण परमात्मा कबीर जी है।
हम इसे प्रमाण देकर सिध्द करेंगे।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब सतयुग में सत सुकृत नाम से आते हैं। ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 और सूक्त 96 मंत्र 17 और 18 ऋग्वेद मंडल 9 के मंत्र 1 में प्रमाण है की पूर्ण परमात्मा की परवरिश कुंवारी गायों से होती है और ऐसी लीला कबीर साहिब जी ने की थी।
ऋग्वेद मंडल 9 ,96 के सुक्त मंत्र 17 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब बालक रूप मे प्रकट होते हैं और अपनी महिमा खुद बताते हैं। गीता अध्याय 2 का श्लोक 17 नाशरहित तो उसको जान (येन्) जिसका विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है। पूर्ण परमात्मा अविनाशी है, वो कभी मरता नहीं। और वह कभी न मरने वाला अविनाशी परमेश्वर कबीर साहिब जी है।
पवित्र कुरान शरीफ में प्रभु सशरीर है तथा उसका नाम कबीर है - सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 52 से 59 Alla Kabir
📚 सर्व सृष्टी रचनहार कबीर परमात्मा है। जो तेजोमय शरीर युक्त है। जो साधकों के लिए पूजा करने योग्य है। जिसकी प्राप्ति तत्वदर्शी संत के द्वारा बताए वास्तविक भक्ति मार्ग से विका…
यह उस समय की बात है जब परमात्मा कबीर काशी शहर में रहते थे। उन्हें वहाँ रहते 120 वर्ष हो गए थे । उन दिनों काशी के कर्मकांड़ी पंडितों (तथाकथित गुरुओं) ने यह धारणा फैला रखी थी कि जो मगहर में मरेगा वह गधा बनेगा और जो काशी में मरेगा वह सीधा स्वर्ग जाएगा ।
परमेश्वर कबीर जी ने इस भ्रम के निवारण के लिए तय किया कि मैं मगहर में जाकर अपना तेज पुंज का शरीर त्यागने की लीला करूंगा जिससे समाज में फैली यह भ्रांति पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगी । उन्होनें घोषणा कि ऐ पंडितों! देख लेना कि मगहर जाकर भी स्वर्ग से ऊपर (सतलोक) जाऊंगा ।
यह कहकर परमेश्वर कबीर जी ने काशी से मगहर के लिए प्रस्थान किया । बीर सिंह बघेला और बिजलीखां पठान दोनों ही कबीर साहेब के शिष्य थे । दोनों में लड़ाई रहती थी । दोनों ही कबीर साहब को दूसरे से ज़्यादा प्रेमी मानते थे । दोनों पक्षों में यह बात चल पड़ी कि कबीर साहब के मरने के बाद उन्हे उनकी रीति से ही अंतिम संस्कार किया जाएगा ।
बीर सिंह बघेला भी परमेश्वर कबीर साहेब के साथ सेना लेकर चल पड़े । निश्चय कर लिया कि परमेश्वर के शरीर छोड़ने के पश्चात उनके श…
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